निराला:-
२. परिमल-- १९२९
३. गीतिका-- १९३६
४. अनामिका-- १९३८ (द्वितीय)
५. तुलसीदास --१९३९, रचना-काल -- - १९३४; 'सुधा' में १९३५ में प्रकाशित ; पुतकर १९३९ में प्रकाशित
६. कुकुर्मुत्त्ता -- १९४३
७. अणिमा -- १९४३
८. बेला -- १९४६
९. नए पत्ते -- १९४६
१०. अर्चना -- १९५०
११. आराधना -- १९५३
१२. गीत कुञ्ज -- १९५४
13. सांध्य काकली -- 1969
धूमिल (१९३१-1976)
काव्य-संग्रह
संसद से सड़क तक - -- 1972
कल सुनना मुझे ---- 1977
सुदामा पाण्डे का प्रजातंत्र --- 1984
पुरस्कार
1975 में मध्यप्रदेश सरकार के साहित्य परिषद् द्वारा 'संसद से सड़क तक ' पर मुक्तिबोध पुरस्कार दिया .
1979 में कल सुनना मुझे पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला .
संग्रहों में संकलित रचनाएँ
संसद से सड़क तक --- कविता, बीस साल बाद, जनतंत्र के सूर्योदय में, अकाल दर्शन, बसंत, एकांत कथा, शांति पाठ, उस औरत की बगल में लेटकर, राजकमल चौधरी के लिए, मोचीराम, शहर में सूर्यास्त , प्रौढ़ शिक्षा, मकान, एक आदमी, पतझड़, कवि 1970 , नक्सलबाड़ी, कुत्ता, शहर, शाम और एक बूढ़ा मैं, सच्ची बात, हत्यारी संभावनाओं के नीचे, मुनासिब करवाई, भाषा की रात, पटकथा.
नोट :- इस संग्रह में 1966 से 1970 तक की कुल 25 कविताएँ संकलित हैं.इस संकलन का नाम तीन बार परिवर्तित किया गया.इसका पहला नाम भाषा की रात, दूसरा नाम हत्यारी संभावनाओं के नीचे, तथा तीसरा नाम संसद से सड़क तक ,रखा गया. उनकी इस रचना पर सन 1975 में मध्यप्रदेश सरकार के साहित्य परिषद् द्वारा मुक्तिबोध पुरस्कार प्रदान किया गया.
कल सुनना मुझे :- जवाहर लाल नेहरु की मृत्यु पर, आस्था, दस्तक, देश प्रेम:मेरे लिए, किस्सा जनतंत्र, प्रजातंत्र के विरुद्ध, कविता श्री काकुलम, आतिश के आनर-सी वह लड़की, मुक्ति के तुरंत बाद, एक कविता : कुछ सूचनाएं, सुदूर पूर्व में, रोटी और संसद , लेनिन का सिर, शब्द जहाँ सक्रिय हैं, अंतर, बारिश में भींगकर , दूसरे का घर, कल, दिनचर्या, नगर कथा, गृहस्थी : चार आयाम, सापेक्ष्य संवेदन, युवा सदी गति है,उसके बारे में, खेवली, खून के बारे में कविता, मैं हूँ, मेरी कविता, आलोचक, कविता के द्वारा हस्तक्षेप, आज मैं लड़ रहा हूँ, पराजय बोध, मृत्यु चिंता, प्रवेश-पत्र, गाँव में कीर्तन , ओ बैरागी : पंडित शांतिप्रिय द्विवेदी , धूमिल की अंतिम कविता.
नोट :- इस काव्य-संग्रह पर सन 1979 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला (मरणोपरांत).
सुदामा पांडे का प्रजातंत्र :- सुदामा पांडे का प्रजातंत्र :एक, सुदामा पाण्डेय का प्रजातंत्र : दो, ट्यूशन पर जाने से पहले, न्यू गरीब हिन्दू होटल, कविता के भ्रम में , बसंत से बातचीत का एक लमहा, रणनीति, ताज़ा खबर, कोडवर्ड, सूखे की छायाएं और एक शिशिर संध्या, संसद समीक्षा, संयुक्त मोर्चा, कर्फ्यू में एक घंटे की छुट, घर में वापसी, गृह - युद्ध, रोटियों का शहर , मेमन सिंह, लोकतंत्र, मैंने घुटने से कहा, अगली कविता के लिए, पर्वतारोहण : नवम्बर 1971 , बीसवीं शताब्दी का सातवां दशक, मैं सहज होना चाहता हूँ, मेरा गाँव, शिविर नंबर तीन, चानमारी से गुजरते हुए, नौजवान, जनतंत्र : एक हत्या सन्दर्भ, मुक्ति का रास्ता, गुफ्तगू, मतदाता, चुनाव, सिलसिला, 'स' और 'त' का खेल, निहत्थे आदमी से कहा , हरित क्रांति, हरित क्रांति : एक, हरित क्रांति : दो, हत्यारे : एक, हत्यारे : दो, वापसी, अब मैं अगली योजना पर बात करूँगा, लोहसाँय , कमरा, आदम इरादों से बित्ता भर उठी हुई पृथ्वी, खून का हिसाब, नींद के बाद, रात्रिभाषा, भूख, प्रस्ताव, 20 मादा कविताएँ, एक : पि सुदामा और मूर्ति के लिए, दो : पत्नी के लिए, तीन : सत्यभामा, चार : पुरबिया सूरज, पाँच : पाँचवें पुरखे की कथा, छ: : चमड़े को गाने दो प्यार, सैट : प्यार, आठ : स्त्री, नौ... .
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