Thursday, November 6, 2014

यही सच है और मछलियाँ : एक  तुलनात्मक अध्ययन
 '' उसे लगा कि जैसे इस बीच विजी ने अपने को थोेड़ा -सा और दूर हटा लिया  है। दोनों के बीच की दुरी , अनकही बातों की दीवार बढाती जा रही है। ''  - 95
           कहानी के ये संवाद  वे बिंदु हैं जहाँ से कहानी के कई आयाम खुलते हैं।

'' वाशिंगटन में मैंने  एक नाटक देखा था ,  जो बहुत पसंद आया।  'छोटी मछली , बड़ी मछली' . जिसमे  बड़ी मछली छोटी मछलियों को निगलती रहती है। तब से कभी कभी सोचती हूँ कि  क्या छोटी मछली उलटकर वार  नहीं कर सकती ?'' -- ९५
नत्रजन विजी से पूछता है -- ''घर में सब ठीक है? पिता, भाई -बहन.?
वीजी ने इस पर्श्न पर चकित आँखें उठायी और कहा , '''"वे लोग मुझे चिट्ठी ही कहाँ लिखते हैं .'' -- ९५

'' अच्छा नटराजन , वह तुम्हें वह बहुत पसंद है ?बहुत अच्छी लगती है ?'' - ९५

यह स्थिति क्यों है।  क्यों वह मनीष  का इंतजार करना चाहती हैै? क्यों चाहती है कि नटराजन शादी न करे।  क्यों  नटरान मूकी और वीजी किसी के भी साथ सम्पूर्णतः अटैच  नहीं है। कुछ ऐसी  ही स्थिति वीजी की  भी  है।  क्यों?

ऐसा क्यों है कि अपने दोस्त की गर्ल फ्रेंड  के प्रति   आकर्षण  को लेकर नटराजन के मन में कोई नैतिक बोध नहीं  है? यह जानते हुए भी कि मनीष अच्छा लडका नहीं वह उससे दोस्ती नहीं तोडता क्यों? वह  वीजी को भी मनीष का सच क्यों नहीं बताता ? वीजी मनीष  का सच जानकर भी उससे अलग क्यों नही हो पाती ?  यह अवचेतन में निहित भोगवाद है या ह्रदय जगत का मूल्य विहिन हो जाना है अथवा प्रेम  है ? अवचेतन मन से काटकर इस कहानी को   नहीं पढा जा सकता , क्योंकि नटराजन और वीजी दोनों में कम्प्लेक्स हैै।  उनके इस काम्प्लेक्स में उनकी उलझन का  एक बडा रहस्य छिपा है।  मनीष  और मूकी में यह कम्प्लेक्स नहीं है। इसीलिए वे जटिल उलझन में नहीं हैं।  प्रमाण कि नटराजन सोचता है कि उसमें ऐसा है क्या कि वह मूकी को रिझा सके , बांध सके ?  मनीष  के प्रति सब सहज आकृष्ट  हैं ,। मनीष  इन दोनों लड़कियों को भोग चुका है। जरा सोचिये यह बात सोचकर ही  नटराजन  को कितनी फ़्रस्ट्रेशन होती होगी ? फ़्रस्ट्रेशन इसलिए कि  नटराजन  तेज है , प्रतिभावान है , मेहनती है , अछा और ईमानदार इंसान  है , सचा है , कमिटेड है , यानि मनुष्यता  की कमी नही फिर भी उपेक्षित है , इसके विपरीत मनीष  धोखेबाज़ है  , हर लड़की को केवल भोग की निगाह से देखता है  , किसी के प्रति कमिटेड नही है, गुणवान और कामयाब भी नही है , केवल सुन्दर है और इस एक क्वालिटी पर  सारी  मनुष्यता कुर्वान ?   विजय लक्ष्मी मनीष के  लिए पागल है , घर और  अपनों को छोड़कर उसके पीछे भागी आई , मुकी भी मनीष के ही  पीछे- पीछे घूमती रही। इसमें   में नटराजन  को क्या मिला? मनीष का फेका जूठा ! अगर नटराजन  जैसे लड़के इन्हे अपनाने से इंकार कर दें तो इधर ये गहरे अकेलेपन की शिकार होंगे   और उधर वे  गहरी  अकेलेपन की  शिकार होंगी  ! सवाल मूल्यों के  विगलन का है। बाजार और पूंजी के खेल ने दुनिया को भोगवादी बना दिया है। जीवन के केंद्र में मूल्यों  की  जगह भोग स्थापित हो गया है।  फलस्वरूप शरीर , रूप और पैसा जीवन के केंद्र  में आ गये हैं  और बाकी  हर चीज गहरे तौर पर उपेक्षित हो गयी है। पूरी दुनिया भोग वनाम मूल्य के संघर्ष से गुजर रही  है।  चुकि  शक्ति पूंजी केंद्रित है और पूंजी भोग के दर्शन को बढ़ावा देती है फलस्वरुप  जीवन की ये सारी  विसंगतियां मनुष्य की अनेकशः कुंठाओं और उपेक्षाओं  से भर रही है। सवाल यह  नही कि  जिनके पास रूप और पैसा है वे सबकुछ हासिल कर लेंगे , और जिस इस खाने में फिट नहीं बैठते उन्हें कुछ नहीं मिलेगा बल्कि एक वक्त के बाद विजी और मुकी जैसी हर लड़की  उपेक्षा की शिकार होगी क्योंकि  रूप और भोग की दुनिया ही ऐसी है कि जहाँ  कोई लॉन्ग लाइव नही होता। यहाँ जो ज्यादा चमकता है उसीकी मार्केट  होती है , चमक फीकी पड़ी ,बाजार से आउट। ऐसा इसलिए की इस बाजार में मूल्य नही चमक देखी  जाती है। यह स्त्री मुक्ति का ऐसा प्रलोभन है  जहाँ  सबसे अधिक दर्द  स्त्रियों को ही मिलता है ,सबसे अधिक वही  उपेक्षित होती  हैं , बाजार से आउट डेटेड होती हैं।
नटराजन को यह सवाल बहुत परेशान करते हैं , शायद नटराजन  जैसे हर पुरुष को करेंगे -- ''और ऐसी साधना मनीष के लिए ! मनीष , जिसने की एक दिन बहुत ठंढे , अनासक्त भाव से कह दिया था : विजी के   लिए मेरे मन में अब कुछ नहीं बचा।  सीधी , सरल , अनकम्प्लीकेटेड  लड़की है। मुझे बांध सके , संतुष्टि दे सके ऐसी मानसिक गहराइयाँ नहीं हैं उसमे।मुझे पत्नी चाहिए तो मुकी जैसी  कलात्मक , स्फूर्तिदायक , इंटलैक्टुअल। ' फिर उसे मुकी भी  बांध न सकी। '' - ९७
सवाल है कि  स्त्रियों को  मनीष जैसे लोग अधिक क्यों पसंद हैं ? उनकी आँखों में मनीष के लेकर ही  क्यों दर्द है? ? उनका अंतर्जगत   मनीष  के दर्द को क्यों संजोये है (मुकी) . समाज मनीष के रास्ते पर क्यों चल पड़ा है? मनीष का मार्ग ही एक मात्र सत्य क्यों बनता जा रहा है आज के समय में ?नटराजन  के रास्ते के लिए कितनी  जगह बची है आज की दुनिया में ?
विजी नटराजन से कहती है --'' न जाने क्यों तुम्हें सम्मुख पाकर मैं बिखरने लगती हूँ --  जो कुछ  तहों में छिपा छिपाकर रखती हूँ , तुम्हारे आगे चीख-चीख कर कहना चाहती हूँ। -  - ९७
मुकी नटराजन और बीजी की तरह पूरी दुनिया ही साथ रहते हुए भी गहरे अकेलेपन से भर गयी है। इसके पीछे का कारण  क्या है?  बीजी और नटराजन  बेस्ट फ्रेंड हैं , हर बात  शेयर करते हैं , मुकी उसकी पत्नी बनने जा रही है,  , फिर भी सब  अकेलापन क्यों फील कर रहें हैं ? इसकी गहराई   में गए बिना आप भारतीयों समाज की इन विकट  समस्याओं को समझ नहीं सकते।

1 comment:

  1. कौन सी कहानी की है..? और लेखक कौन है..?

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