मोदी महाभिनिष्क्रमण
जशोदा बेन SAID ----
राजनीतिक महाभिनिष्क्रमण पर जाते
प्रिय हमसे पूछकर न सही
कहकर तो जाते।
क्या मुझको अपनी पथ-बाधा ही पाते ?
संघ के महाबोधि के निचे ,
अपने पाया कुर्सी का मार्ग,
आप मेरे लिए पलभर भी नहीं पछताते ,
प्रिय ! एकबार कहकर तो जाते।
वर्षों रहे सन्यास जीवन में ,
राजनीतिक सत्य तलासते।
गोधरा ने दिया वह मार्ग
जनसंहार के लिए तनिक न पछताते
प्रिय ! एकबार कहकर तो जाते।
हिंदुत्व और साम्प्रदायिकता
का मिला सत्य महान
आपने दिया राष्ट्र को
नव हिंदुत्वा का नया मार्ग
गर्व से आपकी पीठ राजनाथ थपथपाते
प्रिय ! एकबार कहकर तो जाते।
आडवाणी की कुर्सी छीनी ,
अडानी को गले लगाया
देश की महिलाओं को सुरक्षा देते
बस भूल गए हमारा मार्ग
एकबार इधर भी तो आते
प्रिय ! एकबार कहकर तो जाते।
मैं आपकी सफलता के लिए करती उपवास
करती कठोर कई व्रत
तीर्थ करती निभाती रही पतिव्रत
क्या आपकी आँखों में कभी आंसू नहीं आते
प्रिय ! एकबार कहकर तो जाते।
मोदी---
राजनीतिक महाभिनिष्क्रमण पर जाते
गोपा , हम तुम्हे कैसे ले जाते ?
जशोधरा ----
राहुल तू निर्णय कर इसका
न्याय पक्ष लेता है किसका
माँ मेरी क्या बानी
मैं तो बस देख रहा कहानी
नेताजी तुम्हरे घर पैसा कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर पैसा कहाँ से आया ?
देशभर में बेकारी ने है मुँह फैलाया ,
नेताजी तुम्हरे घर .............
गरीबों के बच्चे हैं भूखे ,
प्रसूतियों के होठ हैं सूखे ,
अपने भविष्य से नवयुवक हैं हताश ,
महंगाई ने है अपना रंग दिखलाया ,
नेताजी तुम्हरे घर सोना-चांदी कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर .............
लुटती इज्जत से युवतियाँ हैं हताश ,
अपनी सुरक्षा से खुद पुलिस भी है निराश ,
हर जगह असुरक्षा ने है मुँह फैलाया ,
नेताजी तुम्हरे लिए जेड (z) प्लस कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर .............
युवकों को मिलता नहीं रोजगार ,
सब लूट लेता है बाजार ,
बाजार की माया ने है जाल फैलाया ,
नेताजी तुम्हरी मुट्ठी में बाजार कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर .............
क्यों सब (जनता ) तुम्हरे जैसा नहीं ,
बस-भाड़े के पैसे नहीं पब्लिक को,
यह राज समझ नहीं आया कि
तुम्हरे निकम्मे लाडले के पास
मर्सिडीज कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर इतना माल कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर .............
गाँव में हमारे एक जिगरी दोस्त हैं -- सुशील शास्त्री। उन्होंने बच्चन जी की कविता पढ़कर अपनी कविता बना डाली है। खुश होकर उन्होंने फोन पर मुझे सुनाया, सोचा आपसब से शेयर करूँ।
इस पार प्रिय तुम हो
इस पार प्रिय तुम हो , मोबाईल है ,
उस पार न जाने क्या होगा !
तुम भेजकर मैसेज मेरा मन बहला देती हो ,
तुम्हारे बिना जीवन का हश्र न जाने क्या होगा!
तेरे मैसेज से दिल की धड़कन बढ़ जाती है
सोचो तेरे कॉल से क्या होगा !
अभी तो इतनी ख़ुशी है , चहक है ,
फिर न जाने क्या होगा !
आँखें देख जहाँ तक पाती हैं,
तुम ही तुम नज़र आती हो ,
तुम लहराकर अपना नीला दुपट्टा
मेरा मन -सागर लहरा देती हो ,
इस पार प्रिय ....
तुम्हारी तस्वीर
आंसुओं से खाली हो जाती हैं जब आँखें
उनमें भरने की कोशिश करता हूँ
तुम्हारी तस्वीर।
दिल में जगह नहीं हैं
वहाँ ठूस - ठूस कर भरी हैं
तुमसे जुड़ीं तमाम भावनाएँ।
जशोदा बेन SAID ----
राजनीतिक महाभिनिष्क्रमण पर जाते
प्रिय हमसे पूछकर न सही
कहकर तो जाते।
क्या मुझको अपनी पथ-बाधा ही पाते ?
संघ के महाबोधि के निचे ,
अपने पाया कुर्सी का मार्ग,
आप मेरे लिए पलभर भी नहीं पछताते ,
प्रिय ! एकबार कहकर तो जाते।
वर्षों रहे सन्यास जीवन में ,
राजनीतिक सत्य तलासते।
गोधरा ने दिया वह मार्ग
जनसंहार के लिए तनिक न पछताते
प्रिय ! एकबार कहकर तो जाते।
हिंदुत्व और साम्प्रदायिकता
का मिला सत्य महान
आपने दिया राष्ट्र को
नव हिंदुत्वा का नया मार्ग
गर्व से आपकी पीठ राजनाथ थपथपाते
प्रिय ! एकबार कहकर तो जाते।
आडवाणी की कुर्सी छीनी ,
अडानी को गले लगाया
देश की महिलाओं को सुरक्षा देते
बस भूल गए हमारा मार्ग
एकबार इधर भी तो आते
प्रिय ! एकबार कहकर तो जाते।
मैं आपकी सफलता के लिए करती उपवास
करती कठोर कई व्रत
तीर्थ करती निभाती रही पतिव्रत
क्या आपकी आँखों में कभी आंसू नहीं आते
प्रिय ! एकबार कहकर तो जाते।
मोदी---
राजनीतिक महाभिनिष्क्रमण पर जाते
गोपा , हम तुम्हे कैसे ले जाते ?
जशोधरा ----
राहुल तू निर्णय कर इसका
न्याय पक्ष लेता है किसका
माँ मेरी क्या बानी
मैं तो बस देख रहा कहानी
नेताजी तुम्हरे घर पैसा कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर पैसा कहाँ से आया ?
देशभर में बेकारी ने है मुँह फैलाया ,
नेताजी तुम्हरे घर .............
गरीबों के बच्चे हैं भूखे ,
प्रसूतियों के होठ हैं सूखे ,
अपने भविष्य से नवयुवक हैं हताश ,
महंगाई ने है अपना रंग दिखलाया ,
नेताजी तुम्हरे घर सोना-चांदी कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर .............
लुटती इज्जत से युवतियाँ हैं हताश ,
अपनी सुरक्षा से खुद पुलिस भी है निराश ,
हर जगह असुरक्षा ने है मुँह फैलाया ,
नेताजी तुम्हरे लिए जेड (z) प्लस कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर .............
युवकों को मिलता नहीं रोजगार ,
सब लूट लेता है बाजार ,
बाजार की माया ने है जाल फैलाया ,
नेताजी तुम्हरी मुट्ठी में बाजार कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर .............
क्यों सब (जनता ) तुम्हरे जैसा नहीं ,
बस-भाड़े के पैसे नहीं पब्लिक को,
यह राज समझ नहीं आया कि
तुम्हरे निकम्मे लाडले के पास
मर्सिडीज कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर इतना माल कहाँ से आया ?
नेताजी तुम्हरे घर .............
गाँव में हमारे एक जिगरी दोस्त हैं -- सुशील शास्त्री। उन्होंने बच्चन जी की कविता पढ़कर अपनी कविता बना डाली है। खुश होकर उन्होंने फोन पर मुझे सुनाया, सोचा आपसब से शेयर करूँ।
इस पार प्रिय तुम हो
इस पार प्रिय तुम हो , मोबाईल है ,
उस पार न जाने क्या होगा !
तुम भेजकर मैसेज मेरा मन बहला देती हो ,
तुम्हारे बिना जीवन का हश्र न जाने क्या होगा!
तेरे मैसेज से दिल की धड़कन बढ़ जाती है
सोचो तेरे कॉल से क्या होगा !
अभी तो इतनी ख़ुशी है , चहक है ,
फिर न जाने क्या होगा !
आँखें देख जहाँ तक पाती हैं,
तुम ही तुम नज़र आती हो ,
तुम लहराकर अपना नीला दुपट्टा
मेरा मन -सागर लहरा देती हो ,
इस पार प्रिय ....
तुम्हारी तस्वीर
आंसुओं से खाली हो जाती हैं जब आँखें
उनमें भरने की कोशिश करता हूँ
तुम्हारी तस्वीर।
दिल में जगह नहीं हैं
वहाँ ठूस - ठूस कर भरी हैं
तुमसे जुड़ीं तमाम भावनाएँ।